Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 187, Verse 13
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 187, verse 13 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 187 · श्लोक 13
संस्कृत श्लोक
यद्यथा कचितं कालं यत्किंचित्कल्पितं तथा ।
तेनैवेयं हि नियतिरित्यप्याकाशरूपकम् ॥ १३ ॥
हिन्दी अर्थ
प्रतीयमान देहादि आकृति का कैसे अपलाप करते हैं ? इस शंका पर कहते हैं।
जिस प्रकार प्रबोध होनेपर (जागनेपर) स्वप्नादि निराकार भासते हैं, वैसे ही ब्रह्मसाक्षात्कार हो
जाने पर यह देह भी निराकृति भासता है, केवल संवित्स्वरूप साकार और स्वानुभूत होनेपर भी जैसे
स्वप्नादि असन्मय हैं वैसे ही देह भी असत् ही है