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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 186, Verses 16–17

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 186, verses 16–17 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 186 · श्लोक 16,17

संस्कृत श्लोक

आमोक्षमेषा जीवस्य भुव्यम्भस्यनिलेऽनले । खे खात्मभिर्जगल्लक्षैः स्वप्नाभैर्भासते स्थितिः ॥ १६ ॥ चिच्चिनोति तथा जाड्यं नरो निद्रास्थितिर्यथा । चिनोति जडतां चित्त्वं न नाम जडतावशात् ॥ १७ ॥

हिन्दी अर्थ

श्रीरामजी ने कहा : हे गुरुवर, इत्यादि कथाओं को कहने में चतुर वह कुन्ददन्त उस दिन से सदा मेरे समीप ही रहता है। वही यह कुन्ददन्त नामक द्विज मेरे पास बैठा हुआ इस सभा में मोक्षउपाय नामक इस सम्पूर्ण संहिता को सुनता था