Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 184, Verse 46
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 184, verse 46 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 184 · श्लोक 46
संस्कृत श्लोक
यस्मिन्सर्वं यतः सर्वं यत्सर्वं सर्वतश्च यत् ।
सर्वं सर्वतया सर्वं तत्सर्वं सर्वदा स्थितम् ॥ ४६ ॥
हिन्दी अर्थ
हम सब लोगों की अभिलाषा कैसे सम्पन्न हुई ऐसी आशंका होने पर कहते हैं।
आप लोग इस परस्परअपेक्षता को प्राप्त हो जाओ क्योकि आप लोगों के इच्छा न करने पर भी
वे आठों भाई मरने के उत्तर क्षण में बहुत काल से अपने घर में ही सप्तद्वीपेश्वर बनकर विराजमान
हैं