Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 180, Verse 14
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 180, verse 14 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 180 · श्लोक 14
संस्कृत श्लोक
लम्बते तस्य शाखायां पुरुषः पावनाकृतिः ।
भानुर्भानाविव रश्मिगृहीतो ग्रथिताकृतिः ॥ १४ ॥
हिन्दी अर्थ
भिन्नसत्तावाली वस्तुओं में सत्ता की ऐक्य प्राप्ति तो लोक में भी प्रसिद्ध है यह कहते है ।
सैकड़ों नदियों से भिन्न होता हुआ भी समुद्र एक ही है, ऋतु, संवत्सर आदि से भिन्न भी काल एक
ही हे