Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 18, Verse 16
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 18, verse 16 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 18 · श्लोक 16
संस्कृत श्लोक
प्रतिबिम्बं पुराणीव पुरःप्राणसरिद्रये ।
अरूढान्यपि चोह्यन्ते रूढान्यपि च नैव च ॥ १६ ॥
हिन्दी अर्थ
सामने स्थित प्राणरूप नदी
में वेग में प्रतिबिम्बित नगरों की ही नाई वासनामात्र होने से अनाविर्भूत तथा आविर्भूत हुए ये
अनेक जगह इधर-उधर पहुँचाये जाते हैं और नहीं भी पहुँचाये जाते