Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 18, Verse 11
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 18, verse 11 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 18 · श्लोक 11
संस्कृत श्लोक
खवातैः खसमाः प्राणा यथोह्यन्ते मनोमयाः ।
उह्यन्ते वै तथैतानि तदङ्गानि जगन्त्यपि ॥ ११ ॥
हिन्दी अर्थ
इतने बड़े वजनदार ये जग्रत् भला कायु द्वारा कैसे उड़ाये जा रहे है, इस पर कहते हैं ।
आकाशवायु के द्वारा आकाशवायु के समान (लघु) मनोमय प्राण जैसे उड़ाये जा रहे हैं
वैसे ही मन के अंगभूत ये अनेक जगत् भी उड़ाये जा रहे हैं