Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 179, Verses 59–62
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 179, verses 59–62 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 179 · श्लोक 59-61
इस समूह का संस्कृत श्लोक-संरेखण अभी परिष्कृत किया जा रहा है; नीचे इसका हिन्दी अर्थ दिया गया है।
हिन्दी अर्थ
यह प्रपंचदृष्टि दृढ़ की गई दिगदृष्टि से ज्यों-ज्यों देखी जाती है त्यों-त्यों यह दुःख शीघ्रातिशीघ्र
मिट जाता है। ज्यों-ज्यों यह प्रपंचदृष्टि चिन्मात्ररूप से चिरकाल तक नहीं विचारी जाती त्यों-त्यों यह
प्रपंच-क्लेश अत्यन्त घन होता जाता है । महापापों से मूर्ख हुए अतएव इस दृष्टि को न देख रहे लोगों
का यह संसार वज के तुल्य दृढ़ हो जाता है, कदापि शान्त नहीं होता हे