Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 176, Verse 76
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 176, verse 76 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 176 · श्लोक 76
इस समूह का संस्कृत श्लोक-संरेखण अभी परिष्कृत किया जा रहा है; नीचे इसका हिन्दी अर्थ दिया गया है।
हिन्दी अर्थ
यह ऋषि-प्रणीत शास्त्र स्मृतिरूप है और
स्मृति का मूल (उद्गम) श्रुति हे । इसलिए श्रुति का ही क्यों विचार न करें इस बुद्धि से प्रमादवश
यदि यह शास्त्र किसी को रुचिकर न हो तो वह किसी अन्य श्रुतिरूप (उपनिषद्, भाष्य आदि रूप)
आत्मज्ञान प्रद शास्त्र का ही विचार करे । अध्यात्मशास्त्र के विचार से विमुख न हों, इसी में हमारा
तात्पर्य है। इसी शास्त्र का अनुशीलन करें इसमें हमारा आग्रह नहीं है