Guru's AddaGuru's Adda

Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 176, Verse 3

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 176, verse 3 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 176 · श्लोक 3

संस्कृत श्लोक

या कथावगतात्मभ्यां शब्दार्थाभ्यां निगद्यते । बुध्यते सेतरा नान्तः सैवेह व्यवहारिणी ॥ ३ ॥

हिन्दी अर्थ

चिदाकाश का जीवभाव अथवा जगद्भाव वास्तविक नहीं है, जिससे कि जगत्‌ उसका शरीर होगा, ऐसा कहते हैं। अनुभव करनेवाला (अनुभवैकरस) चिदात्मा इस प्रकार स्वप्नअंगना के संग की तरह निपट असत्‌ जगत्‌ बनकर अपनी अविद्या से जगत्‌ के रूप से भासित होता है । परमार्थतः वह केवल शान्त चिदाकाश हे