Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 175, Verse 12
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 175, verse 12 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 175 · श्लोक 12
संस्कृत श्लोक
चिदाकाशश्चिदाकाशे तदिदं स्वमलं वपुः ।
चित्तं दृश्यमिवाभाति यथा स्वप्ने तथा स्थितम् ॥ १२ ॥
हिन्दी अर्थ
योगियों के अभिमत समाधि के अभ्यास से आपका अभिमत मोक्ष क्यो प्राप्त नहीं होता 2 इस
प्रश्न पर कहते हैँ ।
पत्थर के सदृश निर्विकल्प समाधि द्वारा सांख्यो के अभिमत मोक्ष के सिवा हमारा अभिमत मोक्ष
यदि प्राप्त हो तो स्वनिद्रा से भी वह प्राप्त हो जायेगा, क्योकि चित्त की चंचलता की निवृत्ति ओर
अज्ञानरूप आवरण की अनिवृत्ति निद्रा ओर उक्त योगियों की सम्मत निर्विकल्प समाधि में तुल्य है,
यह भाव हे