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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 173, Verse 41

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 173, verse 41 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 173 · श्लोक 41

इस समूह का संस्कृत श्लोक-संरेखण अभी परिष्कृत किया जा रहा है; नीचे इसका हिन्दी अर्थ दिया गया है।

हिन्दी अर्थ

इसकी आकारवत्ता का खण्डन कीजिये पर स्मृतिरूपता का क्यो खण्डन करते हैं ? वादी के इस कथन पर कहते हैं। दृश्य की आकारवत्ता में (साकारता में) जो दुःख है स्मृति में भी वही दुःख है क्योकि भार्या, पुत्र आदि के मरण-स्मरण से भी दुख होना दिखलाई देता है । वे दोनों असत्‌ हैं, इसलिए बन्धन का सर्वथा अभाव हे