Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 173, Verse 19
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 173, verse 19 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 173 · श्लोक 19
संस्कृत श्लोक
चिद्व्योम्नोऽत्यजतो रूपं स्वप्नवद्व्यस्तवेदनम् ।
तदिदं हि मनो राम ब्रह्मेत्युक्तः पितामहः ॥ १९ ॥
हिन्दी अर्थ
चिदाकाश का स्फुरण सर्वात्मक होने से स्मृत्यात्मक
भी है, ऐसा यदि कहो तो ठीक हे । इसी अभिप्राय से मैंने भी पहले “यदि वापि भवेत् किंचित्स्मृत्या देहादि
तस्य तत्" इस श्लोक में व्यहार में पूर्ण रूप से शान्त भी उस ब्रह्म को स्मृति नाम से कहा है