Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 169, Verse 8
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 169, verse 8 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 169 · श्लोक 8
संस्कृत श्लोक
यस्य कस्मिंश्चिदप्यर्थे क्वचिद्रसिकतास्ति नो ।
व्यवहारवतोऽप्यन्तः स विश्रान्त उदाहृतः ॥ ८ ॥
हिन्दी अर्थ
जैसे वृक्ष में पत्ते, फूल, गुच्छे
आदि के नाम वृक्ष से अन्य रखता हे वैसे ही समष्टिबुद्धिरूप हिरण्यगर्भ के अनन्तर जन्मे हुए चिद्रूप
वृक्ष के पुष्प आदिरूप पृथिवी आदि का चित् से अन्य बुद्धिसमष्टिरूप हिरण्यगर्भ आदि ने नामकरण
किया, ऐसा समझना चाहिये