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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 164, Verse 46

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 164, verse 46 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 164 · श्लोक 46

इस समूह का संस्कृत श्लोक-संरेखण अभी परिष्कृत किया जा रहा है; नीचे इसका हिन्दी अर्थ दिया गया है।

हिन्दी अर्थ

इस प्रकार का नित्य अपरोक्ष निरतिशयान्दरूप मोक्षपद अतिशय प्रयत्न के बिना कैसे सिद्ध हो सकता है ? इसलिए उसके लिए प्रयत्न के अभ्यास की आवश्यकता है, ऐसा कहते हैं। निरतिशयानन्दरूप परम पद निरन्तर बार बार यत्न किये बिना कदापि सिद्ध नहीं हो सकता । हे श्रीरामचन्द्रजी, आप मोक्षरूप परम पद को महान्‌ अभ्यासरूपी वृक्ष का फल समझिये