Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 164, Verse 23
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 164, verse 23 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 164 · श्लोक 23
इस समूह का संस्कृत श्लोक-संरेखण अभी परिष्कृत किया जा रहा है; नीचे इसका हिन्दी अर्थ दिया गया है।
हिन्दी अर्थ
अभयशून्यता कहाँ प्रसिद्ध हैं ? ऐसा यदि कोई प्रश्न करे, तो उस पर कहते हैं।
यहा पर स्वप्नदर्शन दृष्टान्त का कोन निवारण कर सकता है । स्वप्न असत्मय है" इससे स्वप्न में
शून्यता है “स्वप्न अनुभूत होता है” इससे उसमें शून्यशून्यता भी हे । अनुभूत की असत्मयता में भी
स्वप्न ही दृष्टान्त हे । कारण कि स्वप्न स्वानुभूत होने पर भी असत्मय है