Guru's AddaGuru's Adda

Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 163, Verse 16

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 163, verse 16 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 163 · श्लोक 16

संस्कृत श्लोक

साधुसंपर्कसच्छास्त्रसमालोकनतोऽनिशम् । जितेन्द्रियो यथावस्तु जगत्सत्यं प्रपश्यति ॥ १६ ॥

हिन्दी अर्थ

इसलिए सदा ही एकरूप चिदाकाश ही मैं हूँ यों अपने को आप परम शान्त निर्वेत्तिरूप जानिये ऐसा कहते हैं। शब्दभेदार्थ विहीन अखिलार्थमय चिदाकाशस्वरूप मैं परमशान्ति को प्राप्त होता हूँ परम निर्वाण को प्राप्त होता हूँ, ऐसा आप जानिये