Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 160, Verse 70
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 160, verse 70 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 160 · श्लोक 70
इस समूह का संस्कृत श्लोक-संरेखण अभी परिष्कृत किया जा रहा है; नीचे इसका हिन्दी अर्थ दिया गया है।
हिन्दी अर्थ
मैंने अनन्त वैभववाले अनेक जगतों को देखा, अपने
कर्मो के परिपाक से प्राप्त हुए सुख-दुःख फलों का भोग किया तथा बहुत युगोंतक दिशाओं में भ्रमण
किया, किन्तु ज्ञान के बिना दृश्यरूप दोष का विनाश नहीं हो सकता है