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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 160, Verses 58–59

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 160, verses 58–59 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 160 · श्लोक 58,59

इस समूह का संस्कृत श्लोक-संरेखण अभी परिष्कृत किया जा रहा है; नीचे इसका हिन्दी अर्थ दिया गया है।

हिन्दी अर्थ

वैसे ही यहाँ से नीचे के प्रदेश में भूमि, यहाँ से अन्य प्रदेश में वायु, आकाश आदि भूत, यहाँ से दिशा-विदिशाओं में अन्य अनेक आकारो में यों परमाकाश ही भासित होता है उससे अतिरिक्त कुछ नहीं है, यह अर्थ है । जो ही चिद्‌भान है वही जगत्‌ है। न यहाँपर एकता है और न द्रैत हे ओर न कोई साकारता है ओर न निराकारता है । यथार्थभूतार्थदर्शी के लिए (यथार्थदर्शी के लिए) सारा का सारा दृश्य निराकार ही है