Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 16, Verse 8
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 16, verse 8 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 16 · श्लोक 8
संस्कृत श्लोक
अहंभावनमेवोच्चैर्बीजं दुःखाख्यशाल्मलेः ।
ममेदं तद्वदादीति शाखाप्रसरकारणम् ॥ ८ ॥
हिन्दी अर्थ
इस संसार के दुःखरूपी सेमर के वृक्ष का महान्
बीज अहंभावना ही है तथा उस अहंभावना के समान ही “यह मेरा है” यह भावना भी इस वृक्ष
की मूल है, क्योकि रागादिरूपी शाखाओं के प्रसार की कारण वही है