Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 157, Verse 28
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 157, verse 28 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 157 · श्लोक 28
संस्कृत श्लोक
मन्त्री वदिष्यति ।
न किंचन महाबुद्धे तदस्तीह जगत्त्रये ।
यदनुद्वेगिना नाम पौरुषेण न लभ्यते ॥ २८ ॥
हिन्दी अर्थ
राजा सिन्धु कहेगा : मेरी तरह विदूरथ ने भी राज्य के लिए शुद्ध
संविद्रूप उसकी प्रार्थना क्यो नहीं की ? अथवा विदूरथ की तरह मेने मुक्ति के लिए उसकी प्रार्थना
क्यों नहीं की ?