Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 156, Verse 14
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 156, verse 14 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 156 · श्लोक 14
संस्कृत श्लोक
स त्वं सिन्धुर्भवन्प्राप्तसकलावनिमण्डलः ।
पण्डितैर्मन्त्रिभिः सार्धं करिष्यसि कथा इमाः ॥ १४ ॥
हिन्दी अर्थ
हे व्याध, अब तुम निर्णय का वर्णन कर रहे मुझसे अपना यह भावी वृत्तान्त सुनो ।
वह कानों के लिए भूषणरूप है तथा भूतल में कोई भी मन से भी उसकी सम्भावना नहीं कर सकता,
अतः अद्भूत है