Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 154, Verse 19
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 154, verse 19 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 154 · श्लोक 19
संस्कृत श्लोक
निर्मानमोहा जितसङ्गदोषा अध्यात्मनित्या विनिवृत्तकामाः ।
द्वन्द्वैर्विमुक्ताः सुखदुःखसंज्ञैगच्छन्त्यमूढाः पदमव्ययं तत् ॥ १९ ॥
हिन्दी अर्थ
संविन्मात्ररूप मैं जिसके शरीर में
प्रविष्ट होकर दुश्यवर्ती ओज में रहा वह प्राणी मेरे शरीर के साथ ही पूर्णतया भस्म हो गया