Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 151, Verse 39
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 151, verse 39 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 151 · श्लोक 39
इस समूह का संस्कृत श्लोक-संरेखण अभी परिष्कृत किया जा रहा है; नीचे इसका हिन्दी अर्थ दिया गया है।
हिन्दी अर्थ
तो मेरा व्यष्टिभाव कैसे हुआ और उसमें (व्यष्टिभाव मे) ये सकल भान्तिर्यो कैसे आई ? इस प्रश्न
पर कहते हैं।
व्यष्टिभावरूप स्वप्न को देखने की इच्छा से किसी समय मनोरथरूप तप में बैठे हुए तुम आश्रम
में तपस्वी हुए। वहाँ पुष्ट हुई व्यष्टिभावबुद्धि से अन्य के शरीर के अन्दर स्वप्नादि-कोतुक को देखने
की इच्छा से किसी जीव के हृदय में प्रविष्ट हुए