Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 15, Verse 19
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 15, verse 19 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 15 · श्लोक 19
संस्कृत श्लोक
यन्नास्ति तत्तु नास्त्येव शेषं शान्तमसि धुवम् ।
संप्रबुद्धोऽसि मा भूयो निर्मलां भ्रान्तिमाहर ॥ १९ ॥
हिन्दी अर्थ
जो नहीं है वह तो सर्वथा नहीं
है ही अतः विक्षेपादि दुःखरहित शान्त ब्रह्मरूप ही तुम हो । हे विद्याधर, इसमें सन्देह नहीं कि
अब तुम अच्छी तरह प्रबुद्ध हो चुके हो, अब फिर तुम निर्मूल भ्रान्ति को मत अपनाओ