Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 149, Verse 17
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 149, verse 17 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 149 · श्लोक 17
संस्कृत श्लोक
सकारणत्वकलनात्सर्वमस्य सकारणम् ।
अकारणत्वकलनादस्य सर्वमकारणम् ॥ १७ ॥
हिन्दी अर्थ
जाग्रत, स्वप्न और सुषुप्ति जमे हुए और कुछ पिघले हुए घृत के समान अभिन्न ही हैं, यह उपपादन
करने के लिए भूमिका बोधिते हैं।
जैसे स्वप्न देखकर सुषुप्ति का अनुभव होता है वैसे ही जाग्रत का अवलोकन कर निद्रा का अनुभव
किया जाता है