Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 147, Verse 24
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 147, verse 24 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 147 · श्लोक 24
संस्कृत श्लोक
अप्रौढा मे तदा सासीद्बोधधीर्या तया हता ।
अद्य शक्नोति मे बुद्धिं हन्तुं क इव दुर्ग्रहः ॥ २४ ॥
हिन्दी अर्थ
सर्ग को स्वीकार कर उसका द्रष्टा शुद्ध है यह कहा है । वास्तव में तो द्रष्टा, दर्शन और दृश्यरूप
त्रिपुटी सम्पूर्णतया इस शुद्ध में निवृत्त होती है, ऐसा कहते है ।
न यहाँ द्रष्टा है ओर न भोक्ता है यहाँ सब कुछ चिदेकरस ही है, जो कुछ न होता हुआ भी कुछ है
ओर जो मौन ही अतिशयित वाणीवाला भी हे