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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 147, Verse 16

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 147, verse 16 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 147 · श्लोक 16

संस्कृत श्लोक

ततो विलोकितं तत्र तन्मया दृश्यमण्डलम् । यावत्तमेव पश्यामि ग्रामं प्राक्तनमास्पदम् ॥ १६ ॥

हिन्दी अर्थ

पण्डितो के विचार में तो जात आदि शब्दों का सन्मात्र ही अर्थ है, दूसरा कोई अर्थ नहीं है, ऐसा कहते हैं। "जात" शब्द केवल 'सत्‌' का पर्याय कैसे है, यह तुम सुनो मैं इसका उपपादन करता हूँ। "जन्‌ धातु "जनी प्रादुभवि यों पाणिनि आदि द्वारा प्रादुर्भाव अर्थ में कहा गया है। उसमें प्रादुः अन्य धात्वर्थ की प्रकटता को द्योतित करता हुआ अप्रधान है । भूधातु का सत्तामात्र अर्थ ही प्रादुर्भाव का प्रधान शरीर है