Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 143, Verse 25
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 143, verse 25 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 143 · श्लोक 25
संस्कृत श्लोक
चिता संकल्परूपिण्या सर्गे संकल्पपत्तने ।
त्वयैव स्थापिता संस्था कार्यकारणरूपिणी ॥ २५ ॥
हिन्दी अर्थ
उन महात्माओं का न संसार है,
न द्वैत है और न उनमें विविध कल्पनाएँ ही हैं । विशुद्ध ज्ञानरूपदेहवाले वे आत्मा होने के कारण ही
सर्वात्मा हैं और सदा ज्यों के त्यों बने रहते हैं