Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 143, Verse 24
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 143, verse 24 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 143 · श्लोक 24
संस्कृत श्लोक
संविद्धनोदरे सर्गे कार्यकारणता स्थिता ।
तथा यथोहिता तेन त्वया वा कल्पनापुरम् ॥ २४ ॥
हिन्दी अर्थ
जिनका अधिकार दिलानेवाले उपासना फल के अन्तर्गत ही सहसप्रिद्धं चतुष्टयम्“ इस न्याय से
तत्त्वज्ञान स्वाभाविक (उत्पत्तिकालिक ) ही है उनका कर्म नहीं है, ऐसा मुनि उत्तर देते हैं।
ब्रह्मा, सनक, कपिल आदि जो स्वयम्भू (अपने-आप होनेवाले) सृष्टि के आदि में स्वयं भासित
होते हैं वे ज्ञानमात्रदेहवाले हैं, उनके जन्म और कर्म नहीं होते हैं