Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 140, Verse 17
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 140, verse 17 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 140 · श्लोक 17
संस्कृत श्लोक
स्फुरत्सीकरनीहारमेघाद्रिकृतदिक्तटम् ।
उल्लोलद्वीचिसंदिग्धवहत्कल्पद्रुमव्रजम् ॥ १७ ॥
हिन्दी अर्थ
कब मन शान्त होता है ? ऐसा यदि कोई प्रश्न करे, तो उसपर कहते हैं।
नाड़ियों के अन्नरस, पित्त आदि द्वारा रुद्ध होनेपर संकुचित प्राण जब मन्दगति होकर कहींपर शान्त
होकर रहता है तब मन शान्ति से सुषुप्ति का उदय होता है