Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2) · Sarga 136
3 verse-groups
- Verses 1–5एक सौ चौंतीसवाँ सर्गं समाप्त एक सौ पैंतीसवाँ सर्ग भूत, प्रेतों के झुण्ड द्वारा शव का खा ल…
- Verses 6–11श्रीवसिष्ठजी ने कहा : भास, जब कि देवगण आपस में उक्त वार्तालाप कर रहे थे, वे देवी के गण तृ…
- Verses 12–33इसी तरह देवताओं ने सूर्य को भी पहले की नाई अपने पदपर प्रतिष्ठित कर दिया, पर्वत आदि की रचन…