Guru's AddaGuru's Adda

Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 135, Verses 1–2

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 135, verses 1–2 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 135 · श्लोक 1,2

संस्कृत श्लोक

श्रीवसिष्ठ उवाच । मत्तेन भूतवृन्देन किंचिच्छेषीकृते शवे । इदमूचुः पुनर्दिक्षु गिरौ देवाः सवासवाः ॥ १ ॥ विद्याधरामरविहारविमानभूमावप्यास्तृतान्यशिशिरीकरणाय भूतैः । मेदोमयानि पवनप्रसृतामलाभ्रखण्डाञ्चिताम्बरसमान्युरुजालकानि ॥ २ ॥

हिन्दी अर्थ

इस बीच मेँ जब देवगण देवी की स्तुति कर रहे थे, उस पूर्वोक्त गिर रहे पुरुष ने अपने शरीर से सारे भूतल को आच्छादित कर दिया था, उसको मैंने शवरूप (निर्जीव ) जाना । जिस शवभागने सप्तद्वीपा भूमि को पूर्णतया आच्छादित कर दिया था, सम्पूर्णं भूमि में न समा रहे शव के उसी पर्वततुल्य महान्‌ उदरभाग को मेने देखा

सर्ग सन्दर्भ

एक सौ तैंतीसवाँ सर्ग समाप्त एक सो चौंतीसवाँ सर्ग आविर्भूत हुई देवी कालरात्रि के शरीर का वर्णन तथा गणों द्वारा उस शव का भक्षण, जिसका कि रक्त श्रीदेवी पी चुकी थी।