Guru's AddaGuru's Adda

Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 133, Verses 9–10

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 133, verses 9–10 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 133 · श्लोक 9,10

संस्कृत श्लोक

स जातवेदा भगवान्जन्मान्तरशतार्चितः । मा भैषीरिति देहेन मामुवाचेन्दुशीतलः ॥ ९ ॥ जय देव त्वमस्माकं प्रतिजन्म परायणम् । अकाल एव कल्पान्तो जातोऽतः पाहि मां प्रभो ॥ १० ॥

हिन्दी अर्थ

तदुपरान्त मैं अग्निदेव के वर के प्रभाव से जगत्‌ में चारों ओर अविद्या को देखने की इच्छा कर पवन के समान लगातार गमनयुक्त क्रम ओर संन्निवेशवाले रंग-बिरंगे अच्छी जाति के घोडे ओर मेघो के समान आकारवाले लोगों से तथा हाथी, मृग, सिंह, वृक्ष ओर लताओं से एवं अन्यान्य मृग, पर्वत, सर्प और पक्षियों से व्याप्त अनन्तकोशवाले आकाश में पृथ्वी से जाकर गरुड के समान वेग से आगे बढा