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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 132, Verse 38

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 132, verse 38 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 132 · श्लोक 38

इस समूह का संस्कृत श्लोक-संरेखण अभी परिष्कृत किया जा रहा है; नीचे इसका हिन्दी अर्थ दिया गया है।

हिन्दी अर्थ

तदनन्तर में ब्रह्माजी के वाहन हंस का बच्चा बना । हंस के जन्म में मेने सुमेरु के ऊपर बहनेवाली मन्दाकिनी के दोनों तटों के बीच में विहार करते हुए सुवर्णकमलों के मकरन्द से पीले-पीले जलो का पन्द्रह सौ वर्ष तक पान किया