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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 132, Verses 24–25

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 132, verses 24–25 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 132 · श्लोक 24,25

इस समूह का संस्कृत श्लोक-संरेखण अभी परिष्कृत किया जा रहा है; नीचे इसका हिन्दी अर्थ दिया गया है।

हिन्दी अर्थ

उनकी दुष्टाद्रष्टरूपता का विवरण करते हैं-दूसरे की अक्षयता दिखलाते है । आकाशात्मक (शून्यरूप) शिलामध्य में आकाशात्मक स्वच्छ शिलाओं की तरह चित्‌-अणु के मध्य में तत्‌-तत्‌ आकारवाली वासनाओं से अवच्छिन्न सकल जगत्‌ अनुभव हैं