Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 130, Verse 7
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 130, verse 7 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 130 · श्लोक 7
संस्कृत श्लोक
अङ्गाररहिताकारमिन्धनेन विवर्जितम् ।
स्वच्छं धमधमायन्तमधूममपकज्जलम् ॥ ७ ॥
हिन्दी अर्थ
वासना की एकता और विभाग मेँ क्या हेतु हैं ? उस पर कहते हैं।
देश, काल, कर्म आदि की एकता वासना की एकता है यानी जब भोग्य फल के अनुकूल देश,
काल, कर्म, प्रयत्नरूप सामग्रियों की एकता होती है, तब उनके अनुकूल समान विषय वासनाएँ भी एक
होती हैं जब पूर्वोक्त सामग्रियों में भेद होता है तब वासनाएँ भी भिन्न होती हैँ । लेकिन जब समान देश,
काल, कर्म ओर फलवाली कोई वासना ओर भिन्न देश, काल, कर्म ओर फलवाली दूसरी वासना हो यों
दो वासनाएँ उदभूत हों तब उनके बीच में जो बलवती होती है, उसीकी जीत होती है