Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 130, Verse 23
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 130, verse 23 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 130 · श्लोक 23
संस्कृत श्लोक
असौ मूर्त इवाभासो भासनाम्ना भविष्यति ।
सभास्थैः कैश्चिदित्युक्तं तेन भासः स उच्यते ॥ २३ ॥
हिन्दी अर्थ
जल आदि ब्रह्माण्डआवरण
ब्रह्माण्डखप्परों की तरह विभक्त होकर उन्हीं के आधार में स्थित हैं | खप्पररूप आधारवाले वे जल
आदि आवरण उनमें स्थित होकर लटकते हैं। अवलम्बनकर स्थिति तो सबकी समान है, विभाग केवल
जलावरण का ही है, ऐसा पहले उपपादन कर चुके हैं