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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 121, Verse 1

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 121, verse 1 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 121 · श्लोक 1

संस्कृत श्लोक

श्रीवसिष्ठ उवाच । अथ तेष्वर्णवतटेष्वेते भूमौ विपश्चितः । उपविश्यैतदखिलं चक्रू राज्यप्रयोजनम् ॥ १ ॥

हिन्दी अर्थ

सहचरो ने कहा : हे कमलनेत्र इस तरह का वियोग कालिककथाएँ कह रहा यह सत्री -पुरुष का जोड़ा इस समय उत्तम आसवपान करने के लिये प्रवृत्त है, इसे आप देखिये

सर्ग सन्दर्भ

एक सौ उन्नीसवांँ सर्ग समाप्त एक सौ वीसवों सर्ग वायु, वृक्ष, भ्रमर, वनराजि, देवांगना, समुद्र की लहर, सुवर्णचुड़ पक्षी आदि का वर्णन।