Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 120, Verse 21
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 120, verse 21 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 120 · श्लोक 21
संस्कृत श्लोक
विद्रुमद्रुममिश्राणामम्भोधितटवीरुधाम् ।
बिम्बितार्काः कचन्त्येते पल्लवेषूदबिन्दवः ॥ २१ ॥
हिन्दी अर्थ
तदुपरान्त मरे हुए के पुनः जी जाने से उत्पन्न हुए हर्षवश पथिक लोग चंचल तालियां के विलासरूपी
बाजे के साथ मुझे चिता से उठाकर बहुत सी मांगलिक वृक्ष मंजरियों से मेरे शरीर को विभूषित कर,
मुझे गले लगाकर, सब मेरे चारों ओर खड़े हो गये । मेरे पुनरुञ्ीवन के हर्ष से सबने अडहास किया,
गाया, सब खिलखिलाये ओर नाचे एवं घर को आये