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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 12, Verse 33

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 12, verse 33 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 12 · श्लोक 33

संस्कृत श्लोक

समकाले क्रमाच्चेति मुनिनाथ किमुच्यते । तदनामार्थसच्चेति सच्चासच्चेति किं वद ॥ ३३ ॥

हिन्दी अर्थ

तदनन्तर हे मुनिनाथ, "समकाल में” और “क्रमशः” यह क्यों कहा जाता है ? तथा “वह नामार्थरहित सन्मय ही है" - यहाँ पर यमयट्‌ प्रत्यय से असदंश को लेकर सत्‌ ओर असत्‌ जो कहा गया है, उसमें असदंश क्या है, सो दयाकर कहिये