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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 12, Verse 25

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 12, verse 25 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 12 · श्लोक 25

संस्कृत श्लोक

अहमित्यादिचिद्रूपे विकल्पेनोन्मुखी सती । न पराद्व्यतिरिक्तैषा जलत्वादिव तोयता ॥ २५ ॥

हिन्दी अर्थ

इस रीति से यह आदिचिति ही अहंभावादि विकल्पों से बहिर्मुखी हो जीवभाव को प्राप्त करके भी परमात्मा से तनिक भी ऐसे भिन्न नहीं है, जैसे कि जलरूपता से भिन्न तोयता (जलत्व) नहीं है । तात्पर्य यह है कि भेदक उपाधियों के विकल्पमात्र होने से 'जीव” और “ब्रह्म” शब्द का "जल" ओर "तोय" शब्द की नाई एक अर्थ में पर्यवसान हे