Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 119, Verse 32
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 119, verse 32 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 119 · श्लोक 32
इस समूह का संस्कृत श्लोक-संरेखण अभी परिष्कृत किया जा रहा है; नीचे इसका हिन्दी अर्थ दिया गया है।
हिन्दी अर्थ
हाय, भ्रमरश्रेणी तथा नीलकमलों से परिवेष्टित कमलरूप
पानपात्र से (पीने के बर्तन-कटोरे से) उँडेले जा रहे कमलिन के मधु को पीने से मस्त हुआ और
तट भूमि पर उगे हुए वृक्ष, लता आदि के पल्लवं के नृत्य से प्राप्त हुई मधुर गंभीर शब्द राशि से
प्रख्यापित शीतलता, मृदुता, सुगन्धि आदि गुणों से पूर्ण वायु बहता है