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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 119, Verse 26

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 119, verse 26 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 119 · श्लोक 26

संस्कृत श्लोक

आनीतनानाशवबन्धुसार्थसंरोदनाह्रादिदिगन्तकुञ्जम् । खगावकृष्टार्द्रशिरान्त्रतन्त्रीनिबद्धदग्धद्रुमखण्डजालम् ॥ २६ ॥

हिन्दी अर्थ

थका : तो क्या मयूर अनुचितकारी है ? समाधान : नहीं, मेघ के पेट से निकला हुआ, स्फटिकसा स्वच्छ जल पीकर मोर प्यास से पीडित होकर भी फिर मार्ग में गिरा हुआ कीचड़वाला जल नहीं पीता । शक्रा: तब तो वह मारे प्यास के मर जाता होगा 2 समाधान : नहीं, नहीं, वह मेघ का स्मरण कर हर्षित होता है ओर मरता भी नहीं । क्योंकि गुणवान्‌ पुरुष पर आशा बाँधे हुए लोगों का परिश्रम भी सुखकारी होता है, दुःखद नहीं होता