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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 119, Verse 22

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 119, verse 22 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 119 · श्लोक 22

संस्कृत श्लोक

विषमविनायकसुखदं वलितं भस्माहिशवशिरःप्रकरैः । शशिधवलास्थिकपालं वपुरिव रौद्रं श्मशानमथ दृष्टम् ॥ २२ ॥

हिन्दी अर्थ

यहाँ पर मोतियों को देने के कारण सागर ही सुन्दर वन में वन के वायु से फैलनेवाले तथा चंचल चन्द्रकरूपी सुन्दर तरगों से युक्त मयूरो को नचानेवाला होता है, मेघ नचानेवाला नहीं है, देखिये