Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 119, Verse 21
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 119, verse 21 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 119 · श्लोक 21
संस्कृत श्लोक
पान्थास्ततस्तरलतालविलासवाद्यमालिङ्ग्य मामतनुशेखरपूरिताङ्गम् ।
उत्थापितस्थितिमलं परिवार्य सर्वे नेदुर्जगुर्जहसुराननृतुर्ववल्गुः ॥ २१ ॥
हिन्दी अर्थ
हे राजन् देखिये, ये मयूर वर्षा ऋतु के बच्चों की नाई नाचते हैं, जिनके पंखरूपी
मेघ चमक रहे हैं जो पिच्छ (पंखों के चन्द्रक) रूपी चन्द्रमा को कँपा रहे हैँ