Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 119, Verse 2
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 119, verse 2 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 119 · श्लोक 2
संस्कृत श्लोक
एकत्र श्रृणु किंवृत्तमाश्चर्यमिदमुत्तमम् ।
दातुं त्वन्निकटे दूतमहं चिन्तान्वितोऽवदम् ॥ २ ॥
हिन्दी अर्थ
अरे बगुले, तालाब में बैठा हुआ तू रंग से (सफेद पंखों से) हंस-सा मालूम पड़ता है । कौओं के साथ
मित्रता, क्रूरता (मछलियों पर निर्दय प्रहार करना) ओर कटू वाणी का त्यागकर तू सच (असली)
हंस बन जा