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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 118, Verse 6

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 118, verse 6 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 118 · श्लोक 6

संस्कृत श्लोक

अतिबहुकालविलोलानवलोक्य बकांस्तपोदम्भान् । अत्रैवातिमिरस्थांस्तटवनिता विस्मिता धूर्तान् ॥ ६ ॥

हिन्दी अर्थ

मेधां को छिन्न-भिन्न कर देनेवाले वायु से कम्पित कमलं की राशियों से गिरे हुए परागपुंज की आभा से इसका मध्यभाग बिजली के प्रकाश से पूर्ण-सा मालूम होता है, इसलिए एक ओर जलकणों से भरा हुआ तथा दुसरी ओर अन्धकारपूर्णं यह सरोवर संध्याकाल के आकाश की तरह चारों ओर प्रकाशवाला या अल्प प्रकाशवान हे