Guru's AddaGuru's Adda

Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 118, Verse 3

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 118, verse 3 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 118 · श्लोक 3

संस्कृत श्लोक

गम्भीरं वारिगर्भं प्रसृतजलचरं ये प्रविश्य प्रविश्य प्राङ्मतत्स्यान्प्रोतचञ्चवश्चतुरतर परं जग्धवन्तो विदग्धाः ते केनाप्यद्य दिष्ट्या मृततिमिगमिताः कालयुक्ते महिम्ना नाक्रामन्ति क्रमस्थाः सुहरमपि पुरः पङ्गवो मद्गवोऽमी ॥ ३ ॥

हिन्दी अर्थ

राजन्‌, इस सरोवर को देखिये । यह चारों ओर बिखरे हुए सीकरों से (जलकणो से) दिशाओं के मध्यभागो को वर्फमय बना रहा है, खिले हुए नीलकमल और साधारण कमलो की राशियों के बीच के पुष्पराग से चारों ओर पीला बना है, सुगन्धि से मस्त हुए भरो ओर सारस, क्रौच आदि पक्षियों तथा ब्राह्मणों द्वारा गीतों से इसका यश गान किया जाता है, ऊपर तने हुए चँदवे के समान आकाशस्थ बादल ओर कुहरे को परछाँई के व्याज से धारण कर रहा है