Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 118, Verse 24
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 118, verse 24 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 118 · श्लोक 24
संस्कृत श्लोक
नायं मयूर मकरालयवारिपूरपूर्णोदरो जलधरोऽम्बरमारुरुक्षुः ।
दावाग्निदग्धवनपादपकोटराग्र धूमावलीवलय उत्थित एष शैलात् ॥ २४ ॥
हिन्दी अर्थ
यदि उसकी बराबरी हो
सकती है, तो नाच रही बहू के चाँद के टुकड़े जैसे मन्द मुस्कान युक्त मुखशोभा से ही हो सकती
है