Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 118, Verse 20
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 118, verse 20 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 118 · श्लोक 20
संस्कृत श्लोक
सज्जनाशयनीकाशं त्यक्त्वा बर्ही महत्सरः ।
पिबत्यम्ब्वभ्रनिष्ठ्यूतं मन्ये तन्नतिभीतितः ॥ २० ॥
हिन्दी अर्थ
सुगन्धि, सुन्दरता आदि से शोभित होनेवाले बड़े-बड़े
उत्कृष्ट कमलों के (यशरूपी सुगन्धि से अपने कुल को प्रख्यात करनेवाले महान् पुरुषों के) प्रभाव
का बखान करने की सामर्थ्य शेषनाग में भी नहीं है